Skip to main content

राजा हरिश्चंद्र

राजा हरिश्चंद्र एक बहुत बड़े दानवीर थे। उनकी ये एक खास बात थी कि जब वो दान देने के लिए हाथ आगे बढ़ाते तो अपनी नज़रें नीचे झुका लेते थे।
          
ये बात सभी को अजीब लगती थी कि ये राजा कैसे दानवीर हैं। ये दान भी देते हैं और इन्हें शर्म भी आती है।

ये बात जब तुलसीदासजी  तक पहुँची तो उन्होंने राजा को चार पंक्तियाँ लिख भेजीं जिसमें लिखा था

ऐसी देनी देन जु
               कित सीखे हो सेन।
ज्यों ज्यों कर ऊँचौ करौ
                त्यों त्यों नीचे नैन।।
इसका मतलब था कि राजा  तुम ऐसा दान देना कहाँ से सीखे हो? जैसे जैसे तुम्हारे हाथ ऊपर उठते हैं वैसे वैसे तुम्हारी नज़रें तुम्हारे नैन नीचे क्यूँ झुक जाते हैं?

राजा ने इसके बदले में जो जवाब दिया वो जवाब इतना गजब का था कि जिसने भी सुना वो राजा का कायल हो गया।
इतना प्यारा जवाब आज तक किसी ने किसी को नहीं दिया।

राजा ने जवाब में लिखा-

देनहार कोई और है
                भेजत जो दिन रैन।
लोग भरम हम पर करैं
                   तासौं नीचे नैन।।

मतलब, देने वाला तो कोई और है वो मालिक है वो रमात्मा है वो दिन रात भेज रहा है। परन्तु लोग ये समझते हैं कि मैं दे रहा हूँ राजा दे रहा है। ये सोच कर मुझे शर्म आ जाती है और मेरी आँखें नीचे झुक जाती हैं।
 वो ही करता और वो ही करवाता है, क्यों बंदे तू इतराता है,

*एक साँस भी नही है तेरे बस की, वो ही सुलाता और वो ही जगाता है........*

*🙏🌹 जय बंदी छोड़ की 🌹🙏* सत साहेब

Comments

Popular posts from this blog

प्रलय सात प्रकार की होती है

1. आन्शिक प्रलय    2 प्रकार की होती है. 2. महा प्रलय            3 प्रकार की होती है. 3. दिव्य महा प्रलय   3 प्रकार की होती है. 1.पहली आन्शिक प्रलय - ………………………………………          पहली आंशिक प्रलय कलयुग के अंत में 432000 साल बाद होती है.           प्रत्येक कलयुग के अंत  में  ज्योति निरंजन (काल ब्रह्म) द्वारा  की जाती है, कलयुग के आखिरी चरण  में सभी मनुष्य नास्तिक होंते हैं,सभी मनुष्य का कद की  डेढ से दो फ़ुट , 5 वर्ष की लड़की बच्चे पैदा करेगी, मनुष्य की आयु 15 या 20 साल होगी,,सभी मनुष्य कच्चे मांस आहारी , धरती मे साढे तीन फुट तक उपजाऊ तत्व नही होगा, बड और पीपल के पेड़ पर पत्ते नही होंगे खाली ढूँढ होगी,रीछ (भालू) उस समय का सबसे अच्छी सवारी(वाहन) होगी , ओस की तरह बारिश होगी,ओस को चाटकर सभी जीव अपनी प्यास बुझायैंगे, लगभग सभी औरतें चरित्रहीन, धरती में लगातार भूकम्प आने से  प्रथ्वी रेल गाडी की तरह हिलेगी, कोई भी घर नही बनेगा, सभी मनुष्य चूहे की तरह बिल खोदकर रहे...

पूर्ण राम यानी सच्चा राम कोनसा है

कबीर, एक राम दशरथ का बेटा एक राम घट घट में बैठा। एक राम का सकल पसारा, एक राम त्रिभुवन से न्यारा।। . तीन राम को सब कोई धयावे, चतुर्थ राम को मर्म न पावे। चौथा छाड़ि जो पंचम धयावे, कहे ...

Il सतगुरु कहते हैं कबीर भक्ति ऐसे करनी चाहिय ll

         गुरुदेव सत्संग मे बताते हैं कि पहले एक अनल नाम का पक्षी होता था जो अब लुप्त हो चुका है वो पक्षी आकाश मे बहुत उपर उड़ता रहता था वो आकाश मे अपना अंडा ऐसी जगह देता था जहा नीचे केले का बाग होता था अंडा आकाश से सीधा केले के पोधो पर गिरता था ओर फुट जाता था लेकिन अंडा केले के पोधो पर गिरने के कारण बच्चे को कोई हानि नहीं होती थी अब अनल पक्षी का बच्चा ओर पक्षियों के साथ पृथ्वी पर रह कर अपना भरण पोषण करता है लेकिन उसका ध्यान आकाश मे अपने माता पिता मे रहता है उसे मालूम होता है कि यहा तेरा घर तेरे मा बाप नहीं है तेरे माता पिता तो आकाश मे है इसलिए वह अनल पक्षी का बच्चा एक पल भी अपने माता पिता को नहीं भूलता ओर जब वह बड़ा हो जाता है यानी उड़ने लायक हो जाता है तो वह इतना ताकतवर होता है कि अपने पंजों से हाथियों के झुंड से चार हाथियों  को अपने माता पिता के आहार के लिए उठा कर अपने माता पिता के पास उपर आकाश मे चला जाता है  इसीलिए गरीब दास जी कहते हैं कि अलल पंख अनुराग है सुन मंडल रहे थिर l दास गरीब  उधारीया  सतगुरु मिले कबीर ll जिस प्र...